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Thursday, March 18, 2010

ई-कॉमर्स क्या है?

ई-कॉमर्स उत्पादों एवं सेवाओं की इंटरनेट पर सेल है। यह हमारी अर्थव्यवस्था का सर्वाधिक तेजी से विकासशील खंड है। यह नाममात्र के शुल्क पर न्यूनतम व्यवसाय को भी अपने उत्पाद या संदेश के साध वैश्विक ग्राहकों तक पहुंचने की सुविधा देता है। वर्तमान में, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर 250 मिलियन से ज्यादा लोग इंटरनेट का प्रयोग कर रहे हैं।
ऑनलाइन जनसंख्या के 69 प्रतिशत ने पिछले 90 दिनों में कम से कम एक खरीददारी की है। विश्लेषक वर्ष 2004 तक 3.2 ट्रिलियन डॉलर की बिक्री दर्शाता हैं। इंटरनेट प्रयोगकर्त्ताओं की घरेलू औसत आमदनी 59000 डॉलर है, जो इसे लक्षित व्यवसाय के लिए बहुत आकर्षक जनसांख्यिकी बनाते हैं।
क्या ई-कॉमर्स वेबसाइट आपके व्यवसाय के लिए सही है?
संभवत: आपके व्यवसाय की प्रकृति पर बहुत कुछ निर्भर करता है। यदि आप एक लघु स्वतंत्र पुस्तक भंडार के स्वामी हैं, क्या इसकी अच्छी संभावना है कि आप अपनी पुस्तकें ऑनलाइन बेचकर अमीर बन संकते है। Amazon.com और Barnes एवं Noble ने इस बाजार पर अपनी पकड़ स्थापित की है और उन्होंने मात्र अपने आकार, नाम की पहचान और अपने ग्राहकों के साथ विश्वास के संबंध से इस बाजार पर अच्छी कीमत के साथ (पैमाने की किफायत) और उल्लेखनिय ग्राहक निष्ठा से हावी हो सके हैं।
फिर भी, यदि आप एक स्थानीय पुस्तक भंडार के स्वामी हैं तो नए ग्राहकों तक पहुंचने, आपको बेहतर तरीके से जानने और उन्हें और व्यवसाय के लिए वापस बुलाते रहने के कई तरीके है। आप विशेष प्रमोशन या लेखकों द्वारा पुस्तकें पढ़े जाने की सूचनाएं दे सकते हैं। अपने ई- व्यवसाय के निर्माण करने में विश्वास एक आधारशिला बन सकती है जैसाकि वाटेन बफेट ने कहा है कि "यदि आप आभूषण के बारे में नहीं जानते हैं तो अपने जौहरी को जानें।"
यह जरूरी नहीं है कि वेबसाइट सिर्फ आपके उत्पादों को ऑनलाइन बेचने के लिए ही हो। यह बहुत-सी भूमिकाएं निभा सकता है। वह आपके स्थापित हो चुके खुदरा भंडार की बिक्री का पूरक हो सकता है। यदि आप कोई अद्वितीय उत्पाद बेचते हैं जैसे वीट ग्रास या गूरमे चौकलेट तो आप पूरे देश में (या सच पूछे तो पूरे विश्व में) उन लोगों तक पहुंचने में सफल हो सकते हैं जिन्हें अपने ही शहर में इन उत्पादों को प्राप्त करने की सुविधा नहीं है।
ई-कॉमर्स संचालित करने के लिए इंटरनेट का प्रयोग यह आवश्वासन नहीं देगा कि आप बड़े स्थापित प्रतिस्पर्धियों के साथ सफल ढंग से प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे। उनके पास पहले से ही इनवेंटरी, डिलिवरी और मार्केटिंग व्यवस्था मौजूद है और वे परचून का सामान आप जैसी सस्ती दर पर (या उससे भी सस्ती दर पर) बेच सकते हैं। फिर भी इंटरनेट की खासियत यह है कि वह विश्वव्यापी संभावित ग्राहक उपलब्ध करा सकता है और यह कभी भी बंद नही होता।
आपके ग्राहक दिन के 24 घंटे आपके व्यवसाय के बारे में जानकारी एक्सेस कर सकेंगे। आपने कितनी बार किसी स्टोर के बारे में जानकारी प्राप्त करनी चाही है, उनके लिए येलो पेजेस देखें है, किसी रविवार की सुबह उन्हें फोन किया है और पाया है की वे बंद है? निश्चित रूप से, अधिकांश कंपनियों के पास रिकॉर्ड किए संदेश होते हैं जो बताते हैं कि वे बंद हैं और वे अपने कार्य के घंटों की सूचना आपको देंगें।
लेकिन यह ज्यादा बेहतर है कि सप्ताह के सातों दिनों एक दिन के चौबीस घंटें आपके संभावित ग्राहकों को आपके स्टोर के के बारे में सूचना उपलब्ध रहे। यही नहीं आपके संपूर्ण उत्पादों के बारे में भी। आप उसमें चित्र शामिल कर सकते हैं और संभवत: वीडियो भी । और आपके ग्राहक आपसे दिन के चौबीसों घंटे खरीदारी कर सकेंगे। इसलिए आपकी वेबसाइट का पता सभी जगह प्रमोट करना चाहिए जिसमें आपकी स्टेशनरी, बिक्री के फार्म और विज्ञापन शामिल हैं।

Saturday, August 29, 2009

ई-मेल... लेकिन जरा बच के......!

दुनिया भर में आई सूचना और संचार क्रांति से हमें अगर किसी चीज ने सबसे ज्यादा प्रभावित किया है तो वे हैं मोबाइल फोन और इंटरनेट। इंटरनेट ने आपसी संपर्क और सूचना के आदान प्रदान के क्षेत्र में आमूलचूल तब्दीली लाने में काफी अहम भूमिका निभायी है।इंटरनेट पर मौजूद ‘सर्च इंजन’ के अलावा ‘ई-मेल’ यानी इलेक्ट्रॉनिक मेल सेवा संचार क्रांति में खासी मददगार साबित हुई है। ‘ई-मेल’ की मदद से दुनिया के किसी भी कोने में बैठे शख्स से हम बात कर सकते हैं। शर्त बस इतनी है कि वह शख्स इंटरनेट की सेवा से महरूम न हो।‘ई-मेल’ एक डिजिटल सेवा है जिसके इस्तेमाल से एक दूसरे के संपर्क में रहने के अलावा किसी चीज का प्रचार-प्रसार भी किया जा सकता है ई-मेल के आविष्कार के पीछे मकसद दो या दो से अधिक लोगों के बीच सूचना का तेजी से आदान-प्रदान करना था लेकिन अब इसका गलत इस्तेमाल भी धड़ल्ले से हो रहा है ई-मेल के जरिये जहाँ किसी की मानहानि हो सकती है वहीं, ‘एनोनिमिटी’ यानी अपना असली नाम छुपाकर इसका दुरूपयोग भी किया जा सकता है। कोई भी शख्स किसी के ई-मेल आई-डी यानी किसी अन्य की पहचान और पासवर्ड जानकर दूसरों को धमकी भरा संदेश भेज सकता है और इस मामले की जाँच होने पर वह शख्स शक के दायरे में आएगा जिसके ई-मेल आई-डी से धमकी दी गई। लोगों को अपना काम खत्म होने के बाद सही तरीके से ‘साइन आउट’ करने, किसी को भूलकर भी अपना पासवर्ड नहीं बतानी चाहिए ई-मेल के गलत इस्तेमाल के मामले में सजा के प्रावधान भी है, मानहानि के मामले में भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी कानून के तहत तीन साल की सजा और पाँच लाख रूपए का जुर्माना हो सकता है। इसी तरह ‘स्पैमिंग’, यानी किसी ऐसे व्यक्ति से आपको ई-मेल मिलना जिसे आपने आमंत्रित ही नहीं किया हो, को भारत सहित दुनिया के कई देशों में अपराध घोषित किया गया है।ई-मेल इस्तेमाल करने वालों के सामने आने वाली एक बहुत ही आम समस्या है उनके एकाउंट में वायरस का संचार। दूसरों के एकाउंट में वायरस भेजना भी एक दंडनीय अपराध है। इसमें भी आईटी कानून के तहत तीन साल की सजा हो सकती है। ई -मेल के इस्तेमाल की शुरुआत का इतिहास 1971 से मिलता है। सबसे पहले अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के तहत काम करने वाली कंपनी ‘बोल्ट बेरानेक एंड न्यूमैन’ (बीबीएन) के कंप्यूटर इंजीनियर रहे रे। टॉमलिनसन ने वर्ष 1971 में ई मेल का इस्तेमाल किया। यह पहला इस्तेमाल एक साथ रखे गये दो कम्प्यूटरों के बीच हुआ था।

Wednesday, May 13, 2009

माइक्रोसॉफ्ट इंटरनेट एक्सप्लोरर 8 की खूबियाँ

माइक्रोसॉफ्ट द्वारा हाल ही में इंटरनेट एक्सप्लोरर का नया वर्जन माइक्रोसॉफ्ट इंटरनेट एक्सप्लोरर 8 (बीटा वर्जन) बाजार में उतारा गया है। माइक्रोसॉफ्ट कंपनी का दावा है कि यह एक्सप्लोरर पहले से ज्यादा अपग्रेटेड और सुविधाजनक है। इस एक्सप्लोरर में वेबपेज अपेक्षाकृत तेजी से खुलेंगे और उन्हें लोड होने में भी कम समय लगेगा। एक ओर जहाँ इससे पहले के संस्करण ''इंटरनेट एक्सप्लोरर 7' (आईई 7) में सुरक्षा संबधी जरूरतों पर जोर दिया गया था वहीं इस नए संस्करण में स्थिरता और इस्तेमाल में होने वाली आसानी पर जोर दिया गया है। इसकी एक और खासियत है कि यह एक्सप्लोरर बेहद तेज है। आईई 8 में जावा के इस्तेमाल होने की प्रक्रिया को आसान बना दिया गया है और इसीलिए इस एक्सप्लोरर की क्रियाविधि पहले वाले वर्जन से बेहतर है। इसके कारण इंटरनेट एक्सप्लोरर 8 अपेक्षाकृत कम इंटरनेट स्पीड में भी वेबपेज को पूर्ण रूप से लोड करने की क्षमता रखता है। इसमें 'एक्टिविटी' नामक एक विशेष टूल है जिसके अनुसार उपयोगकर्ता जब एक पते का चयन करता है तो उसके माउस के ऊपर एक नया बटन बन जाता है। उस बटन को क्लिक करके उससे संबंधित सभी संभावित गतिविधियों को देखा जा सकता है। जब उपयोगकर्ता कोई पता टाइप करते हैं तो आईई 8 कम्प्यूटर की हिस्ट्री में मौजूद साइट के पॉप-अप पहले दिखाता है और बाद में फेवरेट में सेव साइट के सुझाव देता है। इसके अलावा यह फेवरेट के गैरजरूरी आरएसएस फीड को डीफॉल्ट सेट नहीं करता। आईई 8 में इंटरनेट उपयोगकर्ता एक नए टूल 'इनप्रायवेट' को 'पोर्न मोड' के नाम से भी चर्चित किया जा रहा है। इस टूल के उपयोग से अपनी पसंदीदा ऑनलाइन गतिविधियों को गुप्त रख सकते हैं। ताकि गूगल या कोई भी अन्य नेटवर्क इंटरनेट के माध्यम से उपयोगकर्ता की व्यक्तिगत जानकारी न ले सके।हालाँकि अन्य ब्राउज़रों जैसे कि फायरफॉक्स और ओपेरा मे भी कुछ इसी तरह की सुविधाएँ हैं, लेकिन 'इनप्रायवेट' टूल को अपेक्षाकृत सबसे उन्नत बताया जा रहा है। इस टूल की मदद से उपयोगकर्ता गोपनीयता (सीक्रेट मोड) में रहकर सर्फिंग कर सकता है, जिससे अन्य नेटवर्क उसकी जानकारी प्राप्त नहीं कर पाते हैं। इससे संभावित “साइबर धोखाधड़ी” से भी बचा जा सकता है। साथ ही इसकी मदद से अवांछित विज्ञापनों तथा स्पैम ईमेल से भी बचाव हो सकता है।